Friday, May 18, 2012

अलसीः चमत्कारी रामबाण औषधि क्यों व कैसे है ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयू एच ओ)े ने अलसी को सुपर फुड माना है। अलसी में ओमेगा थ्री व सबसे अधिक फाइबर होता है। अतः यह स्वास्थ्यप्रद होने के साथ-साथ रोगों के उपचार में लाभप्रद है। इसमें सभी वनस्पितियों की तुलना में अधिक ओगेमा-3 होता है तभी इसे चिकित्सा विज्ञान में ‘‘वेज ओगेमा’’ कहते है । आयुर्वेद में अलसी को दैविक भोजन माना गया। महात्मा गांधीजी ने स्वास्थ्य पर भी शोध की व बहुत सी पुस्तकें भी लिखीं। उन्होंने अलसी पर भी शोध किया, इसके चमत्कारी गुणों को पहचाना और अपनी एक पुस्तक में लिखा है, “जहां अलसी का सेवन किया जायेगा, वह समाज स्वस्थ व समृद्ध रहेगा।”
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अलसी का बोटेनिकल नाम लिनम यूजीटेटीसिमम् यानी अति उपयोगी बीज है। इसे अंग्रेजी में लिनसीड या फ्लेक्ससीड कहते हैं।

ओमेगा 3 की शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका-
  •  यह उत्कृष्ट प्रति-आक्सीकरक है और शरीर की रक्षा प्रणाली सुदृढ़ रखता है।ऽप्रदाह या इन्फ्लेमेशन को शांत करता है।
  •  ऑखों, मस्तिष्क ओर नाड़ी-तन्त्र का विकास व इनकी हर कार्य प्रणाली में सहायक, अवसाद और व अन्य मानसिक रोगों के उपचार में सहायक, स्मरण शक्ति और शैक्षणिक क्षमता को बढ़ाता है।
  •  ई.पी.ए. और डी.एच.ए. का निर्माण।
  •  रक्त चाप व रक्त शर्करा-नियन्त्रण, कॉलेस्ट्रोल-नियोजन, जोड़ों को स्वस्थ रखता है।
  •  यह भार कम करता है, क्योंकि यह बुनियादी चयापचय दर (ठडत्द्ध बढ़ाता है, वसा कम करता है, खाने की ललक कम करता है।
  •  यकृत, वृक्क और अन्य सभी ग्रंथियों की कार्य-क्षमता बढ़ाता है।
  •  शुक्राणुओं के निर्माण में सहायता करता है।

आधुनिक जीवन शैली के कारण शरीर में ओमेगा-3 व ओमेगा-6 का अनुपात बिगड़ गया है। शरीर में ओमेगा-3 की कमी व इन्फ्लेमेशन पैदा करने वाले ओमेगा-6 के ज्यादा हो जाने केे कारण ही हम उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, स्ट्रोक, डायबिटीज, मोटापा, गठिया, अवसाद, दमा, कैंसर आदि रोगों का शिकार हो रहे हैं। ओमेगा-3 की यह कमी 30-60 ग्राम अलसी से पूरी कर सकते हैं। ये ओमेगा-3 ही अलसी को सुपर स्टार फूड का दर्जा दिलाता हैं।
अलसी के सेवन से उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, स्ट्रोक, डायबिटीज, मोटापा, गठिया, अवसाद, दमा, कैंसर आदि रोगों में लाभ होता है। डाॅ. बुझवीड ने तो अन्तिम स्थिति के कैंसर तक का इलाज अलसी के तेल से किया है
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कार्य क्षमता बढ़ाने व कोलॅस्ट्रोल घटाने का अचूक आयुर्वेदिक नुस्खा

अपनी कार्य क्षमता बढ़ा कर सफल होने, स्फूर्ति वान होने व चर्बी घटा कर तन्दरूस्त होने का  यह आजमाया हुआ नुस्खा है। अनेक लोगों ने इसका प्रयोग कर सफलता पाई है। नुस्खा निम्न प्रकार है:
मिश्रण: 50 ग्राम मेथी$ 20 ग्राम अजवाइन$10 ग्राम काली जीरीबनाने की विधिः- मेथी, अजवाइन तथा काली जीरी को इस मात्रा में खरीद कर साफ कर लें। तत्पश्चात् प्रत्येक वस्तु को धीमी आंच में तवे के उपर हल्का सेकें। सेकने के बाद प्रत्येक को मिक्सर-ग्राइंडर मंे पीसकर पाउडर बनालें। तीनों के पाउडर को मिला कर पारदर्शक डिब्बे में भर लेवें। आपकी अमूल्य दवाई तैयार है।

दवाई लेने की विधिः- तैयार दवाई को रात्रि को खाना खाने के बाद सोते समय 1 चम्मच गर्म पानी के साथ लेवें। याद रखें इसे गर्म पानी के साथ ही लेना है। इस दवाई को रोज लेने से शरीर के किसी भी कोने मंे अनावश्यक चर्बी/ गंदा मैल मल मुत्र के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है, तथा शरीर सुन्दर स्वरूपमान बन जाता है। मरीज को दवाई 30 दिन से 90 दिन तक लेनी होगी।
लाभः
- इस दवाई को लेने से न केवल शरीर मंे अनावश्यक चर्बी दूर हो जाती है बल्किः-

  • शरीर में रक्त का परिसंचरण तीव्र होता है। ह्नदय रोग से बचाव होता है तथा कोलेस्ट्रोल घटता है।
  • पुरानी कब्जी से होेने वाले रोग दूर होते है। पाचन शक्ति बढ़ती है।
  • गठिया वादी हमेशा के लिए समाप्त होती है।
  • दांत मजबूत बनते है। हडिंया मजबूत होगी।
  • आॅख का तेज बढ़ता है कानों से सम्बन्धित रोग व बहरापन दूर होता है।
  • शरीर में अनावश्यक कफ नहीं बनता है।
  • कार्य क्षमता बढ़ती है, शरीर स्फूर्तिवान बनता है। घोड़े के समान तीव्र चाल बनती है।
  • चर्म रोग दूर होते है, शरीर की त्वचा की सलवटें दूर होती है, टमाटर जैसी लालिमा लिये शरीर क्रांति-ओज मय बनता है।
  • स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा कदम आयु भी बढ़ती है, यौवन चिरकाल तक बना रहता है।
  • पहले ली गई एलोपेथिक दवाईयां के साइड इफेक्ट को कम करती है।
  • इस दवा को लेने से शुगर (डायबिटिज) नियंत्रित रहती है।
  • बालों की वृद्धि तेजी से होती है।
  • शरीर सुडौल, रोग मुक्त बनता है।

स्वामी रामदेवजी के योग करने से दवाई का जल्दी लाभ होता है।
परहेजः
- 1. इस दवाई को लेने के बाद रात्रि मंे कोई दूसरी खाद्य-सामग्री नहीं खाएं।

2. यदि कोई व्यक्ति धुम्रपान करता है, तम्बाकू-गुटखा खाता या मांसाहार करता है तो उसे यह चीजे छोड़ने पर ही दवा फायदा पहुचाएंगी।

3. शाम का भोजन करने के कम-से-कम दो घण्टे बाद दवाई लें।

(आभारः मानव सेवा केन्द्र, सादड़ी जिला पाली)

डाॅक्टर ओ0 पी0 वर्मा रचित ‘‘अलसी महिमा’’नामक पुस्तिका प्रकाशित हुई है। उक्त पुस्तिका को आप Free Download My Booklets के टेग के नीचे अंकित नाम पर क्लिक कर उसे डाउनलोड करें। छपी हुई पुस्तक आप मुझसे मंगवा भी सकते हंै।


अलसी महिमा : डॉ ओ पी वर्मा

पुस्तिका की विषय वस्तुअलसी एक चमत्कारी आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक दैविक भोजन है। अलसी एक प्राणदायी औषधि है।  कैंसर , ब्लड प्रेशर, अर्थाराइटीस, डाइबीटिज , अपच आदि का इलाज अलसी के सेवन से होता है। जिसका विस्तृत वर्णन पुस्तक में है।अलसी  एक सम्पूर्ण आहार है, इसमें 18 प्रतिशत प्रोटीन 27 प्रतिशत फाइबर, 18 प्रतिशत ओमेगा-3 फैटी एसिड, लिगनेन व सभी विटामिन और खनिज लवणों का भण्डार है। अलसी रक्त को पतला बनाये रखती है। रक्त वाहिकाओं को स्वीपर की तरह साफ करती है। काॅलेस्ट्राल और ब्लड प्रेशर को सही रखती है। अलसी में फाइबर की मात्रा सबसे अधिक है। इसलिए यह ईसबगोल से भी ज्यादा लाभदायक है। तभी अलसी के लिए कहा जाता है कि यह कब्जासुर का वध करती है। अलसी शक्तिवर्धक एंव बाॅडी बिल्ंिडग में सहायक है। तभी डबल्यू एच ओ ने इसे सुपर फूड की संज्ञा दी है। इसके अतिरिक्त पुस्तक मंे डाॅ0 योहाना बुडवीज का कैंसर रोधी आहार-विहार,अलसी के व्यंजन, वसा जो कारक है वसा जो मारक है, अलसी चालीसा, अलसी सेवन से लाभार्थिंयों के अनुभव संग्रहीत है।  ढ़ेर सारी अनेक बातें अलसी के आहार से चिकित्सा से सम्बन्धी मौजूद है।

लेखक के बारे में एलोपैथिक डाॅक्टर ओ0 पी0 वर्मा फ्लेक्स अवेयेरनेस सोसायटी के अध्यक्ष है। देश के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में ंअलसी पर आपके आलेख छपे है। दूरदर्शन पर वार्ताएं प्रसारित हुई है।  इन्होंने नाॅबेल पुरस्कार के लिए नामांकित जर्मन डाॅ0 बुडवीज के आधार पर अलसी से चिकित्सा पर बहुत कार्य किया है। कैंसर जैसे घातक रोगों का इलाज अलसी के द्वारा डाॅ0 बुडवीज ने किया है,जिसे बुडवीज प्रोटोकोल के नामा से जाना जाता है।

सफलता का मंत्र : प्रबल इच्छा से बिलगेट्स बनते है

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प्रबल इच्छा क्या है ? प्रबल इच्छा का तात्पर्य उस दृढ़ निश्चय से है जो हमें किसी लक्ष्यप्राप्ति के लिए करता होता है। यह लक्ष्य शक्ति, ओहदा, धन या ऐसी ही अन्य कोई वस्तु हो सकती है। कुछ बड़ा पाने या करने के लिये महत्त्वाकांक्षा अनिवार्य है। जीवन में कुछ बड़ा करने का दृढ़ निश्चय।
एक स्कूली छात्र ने साॅफ्टवेयर की कम्पनी शुरू की – माइक्रो साॅफ्ट। इसी बीच इस छात्र ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। जब वह अपने स्नातक पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष में था, कम्पनी ने बहुत बड़ा लाभ कमाना शुरू किया । उसकी प्रबल इच्छा थी कि वह अरबपति बने। उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि कम्पनी का काम बढ़ गया था। उसने अपने लक्ष्य को पहचाना और अपने जीवन के महत्त्वाकांक्षी कार्य को बीस वर्ष में पूरा कर लिया। उसकी प्रतिदिन आय वर्ष 1998 में आठ सौ करोड़ थी। आज वह इस धरती का सबसे धनी व्यक्ति है। कौन है वह महान् व्यक्ति ? —- वह बिलगेट्स है।
क्या प्रबल इच्छा, उत्साह एवं साहस के अभाव में तेनसिंह और हिलेरी एवरेस्ट पर्वत की चोटी पर चढ़ने में सफल हो पाते?
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